व्यास का परिचय |महाभारत के रचयिता महर्षि वेदव्यास |Ved Vyas Ka Jeevna Parichay

Admin
0

व्यास का परिचय महाभारत के रचयिता महर्षि वेदव्यास 
Ved Vyas Ka Jeevna Parichay

 

व्यास का परिचय |महाभारत के रचयिता महर्षि वेदव्यास |Ved Vyas Ka Jeevna Parichay

व्यासगिरां निर्यासं सारं विश्वस्य भारतं वन्दे ।

भूषणतयैव संज्ञां यदडिकतां भारती वहति ॥ 

                            गोवर्धनाचार्य

 

  • रामायण तथा महाभारत हमारे जातीय इतिहास हैं। भारतीय सभ्यता का भव्य रूप इन ग्रन्थों में जिस प्रकार फूट निकलता है वैसा अन्यत्र नहीं। कौरवों और पाण्डवों का इतिहास – वर्णन ही इस ग्रन्थ का उद्देश्य नहीं हैअपितु हमारे हिन्दू धर्म का विस्तृत एवं पूर्ण चित्रण भी प्रयोजन है। 


  • महाभारत का शान्तिपर्व जीवन की समस्याओं को सुलझाने का कार्य हजारों वर्षो से करता आ रहा है। इसलिए इस इतिहास ग्रन्थ को हम अपना धर्मगन्थ मानते आये हैंजिसका पठन-पाठन श्रवण-मननसब प्रकार से हमारा कल्याणकारक है। 


  • इस ग्रन्थ का सांस्कृतिक मूल्य भी कम नहीं है। सच तो यह है कि केवल इसी ग्रन्थ के अध्ययन से हम अपनी संस्कृति के शुद्ध स्वरूप से परिचय पा सकते हैं। भारतीय साहित्य का सर्वश्रेष्ठ ग्रन्थ 'भगवद्गीताइसी महाभारत का एक अंश है। इसके अतिरिक्त विष्णुसहस्रनाम', 'अनुगीता', 'भीष्मस्तवराज’, ‘गजेन्द्रमोक्षजैसे आध्यात्मिक तथा भक्तिपूर्ण ग्रन्थ इसी के अंश हैं। इन्हीं पाँच ग्रन्थों को 'पंचरत्नके नाम से पुकारते हैं। इन्हीं गुणों के कारण महाभारत पंचम वेदके नाम से विख्यात है।

 

  • वाल्मीकि के समान व्यास भी संस्कृत कवियों के लिए उपजीव्य हैं। महाभारत के उपाख्यानों का अवलम्बन कर ही कालान्तर में हमारे कवियों ने काव्यनाटकगद्यचम्पूपद्यकथाआख्यायिका आदि नाना प्रकार के साहित्य की सृष्टि की है। इतना ही क्यों जावा,सुमात्रा के साहित्य में भी महाभारत विद्यमान है। वहाँ के लोग भी महाभारत के कथानक से उसी प्रकार शिक्षा ग्रहण करते हैं तथा पाण्डव-चरित के अभिनय से उसी प्रकार मनोरंजन करते हैं जिस प्रकार भारतवासी । 


  • महाभारत इतना विशाल है कि व्यासजी का यह कथन सर्वथा उचित प्रतीत होता है- 'इस ग्रन्थ में जो कुछ है वह अन्यत्र है. परन्तु जो कुछ इसमें नहीं हैवह अन्यत्र कहीं भी नहीं है। 


  • प्राचीन राजनीति को जानने के लिए हमें इसी ग्रन्थ की शरण लेनी पड़ती है। विदुरनीतिजिसमें आचार तथा लोकव्यवहार के नियमों का सुन्दर निरूपण हैमहाभारत का ही एक अंश है। इस प्रकार ऐतिहासिकधार्मिकराजनीतिक आदि अनेक दृष्टियों से महाभारत एक गौरवपूर्ण ग्रन्थ है।


व्यास कौन थे? यह किसी का नाम है अथवा उपाधि ?


महाभारत के रचयिता महर्षि वेदव्यास (वेद व्यास का परिचय)


  • महाभारत के रचयिता महर्षि वेदव्यास का सम्बन्ध महाभारत के पात्रों के साथ बहुत ही घनिष्ठ है। उनकी माता का नाम सत्यवती था। 
  • मल्लाहों के राजा दासराज के द्वारा जन्मकाल से ही उनकी रक्षा तथा पोषण हुआ था।


  • यमुना के किसी द्वीप में जन्म के कारण व्यास जी द्वैपायनकहलाते थेशरीर के रंग के कारण 'कृष्णमुनितथा यज्ञीय उपयोग के लिए एक को वेद चार संहिताओं में विभाग करने के कारण वेदव्यासके नाम से विख्यात थे। 


  • वे धृतराष्ट्र पाण्डु तथा विदुर के जन्मदाता ही नहीं थेप्रत्युत पाण्डवों का के विपत्ति के समय छाया के समान अनुगमन करने वाले थे तथा अपने उपदेशों से उन्हें धैर्यढाढस तथा न्यायपथ पर आरूढ़ रहने की शिक्षा दिया करते थे। कौरवों को युद्ध से विरत् करने के लिए इन्होंने कोई भी प्रयत्न उठा नहीं रखापरन्तु विषय भोग के पुतले इन कौरवों ने इनके उपदेशों को लात मारकर अपनी करनी का फल खूब ही पाया। इनसे बढकर भारतीय युद्ध के वर्णन करने का अधिकारी कोई दूसरा विद्वान् नहीं था। 


  • इन्होंने तीन वर्षो तक सतत परिश्रम से सदा उत्थान से इस अनुपम ग्रन्थ की रचना की। 

 (आदिपूर्व-56/52):

 

त्रिभिर्वर्षै: सदोत्थायी कृष्णद्वैपायनो मुनिः। 

महाभारतमाख्यानं कृतवानिदमुत्तमम् ॥

 

  • ऐसे महनीय ग्रन्थ की तीन वर्षों के भीतर रचना का कार्य ग्रन्थकार की अनुपम काव्य प्रतिभा तथा अदम्य उत्साह का पर्याप्त सूचक है। आजकल महाभारत में एक लाख श्लोक मिलते हैं। इसलिए इसे 'शतसाहस्र-संहिताकहते हैं। 


  • इसका यह स्वरूप कम से कम डेढ़ हजार वर्ष से पुराना अवश्य हैक्योंकि गुप्त कालीन शिलालेख में यह शतसाहस्री संहिताके नाम से उल्लिखित हुआ है। विद्वानों का कहना है कि महाभारत का वह रूप अनेक शताब्दियों में विकसित हुआ। बहुत प्राचीन काल से अनेक गाथाएँ तथा आख्यान इस देश में प्रचलित थेजिनमें कौरवों तथा पाण्डवों की वीरता का वर्णन किया था।


  • अथर्ववेद में परीक्षित का आख्यान उपलब्ध होता है। अन्यवैदिक ग्रन्थों में यत्र-तत्र महाभारत के वीर पुरुषों की बातें उल्लिखित मिलती हैं। इन्हीं सब गाथाओं तथा आख्यानों को एकत्र कर महर्षि वेदव्यास ने जिस काव्य का रूप दिया है वही आजकल का सुप्रसिद्ध महाभारत है।

विषय सूची 

महाभारत के रचयिता महर्षि वेदव्यास

महाभारत का विकास एवं इतिहास,  महाभारत का रचना काल

हरिवंशपुराण- हरिवंश का स्वरूप,  हरिवंश में तीन पर्व या खण्ड

महाभारत के टीकाकार

वेद व्यास की समीक्षा महाभारत रचना के संबंधमें

रामायण-महाभारत की तुलनारामायण और महाभारत में किसकी रचना पहले हुई

संस्कृत साहित्य का इतिहास : महर्षि वाल्मीकि संस्कृत के आदिकवि

रामायण में राजा की महिमा-रामायण मूल्यांकन

Post a Comment

0 Comments
Post a Comment (0)

#buttons=(Accept !) #days=(20)

Our website uses cookies to enhance your experience. Learn More
Accept !
To Top