प्रतिदर्श में ध्यान रखने योग्य बातें , प्रतिदर्श के उपयोग |एक उत्तम प्रतिदर्श के अपेक्षित गुण |Things to keep in mind in sample

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प्रतिदर्श के उपयोग, एक उत्तम प्रतिदर्श के अपेक्षित गुण

प्रतिदर्श में ध्यान रखने योग्य बातें , प्रतिदर्श के उपयोग |एक उत्तम प्रतिदर्श के अपेक्षित गुण |Things to keep in mind in sample



प्रतिदर्श में ध्यान रखने योग्य बातें: 

जब कोई शोधकर्ता यह निर्णय करने की स्थिति में होता है कि उसे अपने अध्ययन के लिये प्रतिदर्श का चयन करना है तो उसे निम्न कुछ बातों का ध्यान रखना चाहिये-

 

जीवसंख्या का आकार 

यदि जीवसंख्या का आकार छोटा है तो ऐसी स्थिति में शोधकर्ता सभी सदस्यों को अपने अध्ययन में शामिल कर सकता है। परंतु यदि जीवसंख्या का आकार बड़ा है तो जैसे उसके सदस्यों की संख्या 10,000 या उससे अधिक है तो शोधकर्ता उस जीवसंख्या से अपने अध्ययन के लिये एक उपयुक्त (appropriate) आकार का प्रतिदर्श का चयन कर ले ये एक बेहतर विकल्प है। अतः स्पष्ट है कि जब जीवसंख्या का आकार बड़ा होता है केवल तभी प्रतिदर्शन की आवश्यकता होती है।

 

2 प्रतिदर्शन की लागत (Cost of Sampling)

 

प्रतिदर्शन किया जाय या नहीं या फिर यदि किया जाय तो प्रतिदर्श में कितने सदस्य होगेंयह इस बात पर भी निर्भर करता है कि इन सभी प्रक्रियाओं का खर्च कितना आयेगा और वह शोधकर्ता के बजट के अनुरूप है या नहीं। परन्तु यदि ऐसा नहीं हैतो शोधकर्ता को उसी के अनुसार प्रतिदर्शन परियोजना (Sampling Plan) में परिवर्तन करना पड़ता है।

 

3. जीवसंख्या के सदस्यों की उपलब्धता (Accessibility of Members of Population) - 

प्रतिदर्शन में सम्मिलित प्रतिदर्श को जीवसंख्या से आसानी से प्राप्त किया जा सके इस बात का विशेष ध्यान रखना आवश्यक है। यदि वे शोधकर्ता के लिये दुर्लभ हैतो वैसी परिस्थितिमें उन्हें प्रतिदर्श में सम्मिलित नहीं किया जा सकता है और ऐसी स्थिति में शोधकर्ता को अपनी विशेष परियोजना (Planning ) में परिवर्तन करना पड़ता है।

 

स्पष्ट है कि प्रतिदर्शन करते समय यदि उपरोक्त बातों को ध्यान में रखा जाएतो इससे प्रतिदर्शन का स्वरूप अधिक शोधनीय ( researchable) होगा ।

 

प्रतिदर्श के उपयोग ( Use of Sampling) : 

प्रतिदर्शन की आवश्यकता अथवा उपयोग के कुछ मुख्य कारण निम्नवत है -

 

1 खर्च में कमी

 

प्रतिदर्श का उपयोग सर्वेक्षणों में अधिक होता है। जहाँ सीमितधनसमयव्यक्तियों एव साधनों से एक जनसंख्या के विषय में किसी चर का मान प्रस्तुत करना पड़ता हैवहाँ यदि सभी इकाइयों का सर्वेक्षण किया जाये तो सीमित साध न से सीमित समय में काम सम्पन्न नहीं होगा।

 

2 दक्षता में वृद्धि

 

परिणाम एवं उनको प्राप्त करने के लिये किये गये व्यय के अनुपात को दक्षता कहते हैं। यदि सभी इकाइयों का अध्ययन न करने से परिणाम में कुछ त्रुटि रह गयी तो भी व्यय में अधिक कमी हो जाने के कारण सर्वेक्षण की दक्षता बढ़ जाती है।

 

3 परिणाम की शुद्धता

 

परिणाम की शुद्धता परिणाम प्राप्त करने में लगी हुई जनशक्ति की कुशलता पर निर्भर है। सभी इकाइयों का अध्ययन करने के लिये अधिक व्यक्तियों की आवश्यकता होगी जिन्हें सीमित साधनों से प्राप्त नही किया जा सकता और यदि सर्वेक्षण दोषपूर्ण हुआ तो अधिक इकाइयों के अध्ययन से त्रुटि में विस्तार ही होगा

 

एक उत्तम प्रतिदर्श के अपेक्षित गुण 

(Requisites of a Good Sampling Method): 

किसी प्रतिदर्शन विधि को एक उत्तम प्रतिदर्शन विधि कहलाने के लिये यह आवश्यक है कि उसमें अन्य बातों के अलावा निम्न दो गुण अवश्य हो -

 

1 प्रतिनिधित्वता ( Representativeness

 

किसी भी प्रतिदर्शन प्रविधि का एक प्रमुख अपेक्षित गुण यह है कि उससे तैयार किया गया प्रतिदर्श का स्वरूप प्रतिनिधिक (reprsentative) हो । एक प्रतिनिधिक प्रतिदर्श से तात्पर्य वैसे प्रतिदश से होता है जिनमें उन सभी गुण या विशेषताओं की झलक मिलती है तो उस जीवसंख्या में होते हैं जिनमें उनका चयन किया गया था ।

 

2. पर्याप्तता

 

एक उत्ततम प्रतिदर्शन की एक विशेषता यह भी है कि उसका आकार ( size) पर्याप्त हो । आकार पर्याप्त ( adequate) होने से तात्पर्य यह है कि उसमें विशेषताओं की संख्या यथासम्भव अधिक हो । प्रतिदर्श का आकार बड़ा रहने से प्रतिदर्श त्रुटि (Sample Error) की सभावना कम हो जाती है। अध्ययनों से यह स्पष्ट हो गया है कि प्रतिदर्श के आकार तथा प्रतिदर्शन त्रुटि में नकारात्मक सम्बन्ध (Negative Relationship ) होता है। दूसरे शब्दों में कह सकते हैं कि जैसे जैसे प्रतिदर्श का आकार बढ़ता जाता है वैसे वैसे त्रुटि की संख्या कम होती जाती है।

 

प्रतिदर्श को दोषपूर्ण बनाने वाले घटक

 (Factors Making Defective Sample ) : 

प्रतिदर्श से प्राप्त वर्णनात्मक सांख्यिकी (descriptive statistic) का समष्टिज (Parameter) से महत्वपूर्ण रूप से भिन्न होना दोष है। इस दोष के दो कारण होते हैं :

 

(अ) प्रतिदर्शीय त्रुटि (Sampling Error) और 

(ब) अप्रतिदर्शीय त्रुटि (Non Sampling Error)

 

1 प्रतिदर्शीय त्रुटि ( Sampling Error) - 

यह त्रुटि प्रतिदर्शन के कारण उत्पन्न होती हैं। संभाव्यता प्रतिदर्शन (Probability Sampling) में इसे सांख्यिकी की सहायता से अनुमानित किया जा सकता है। अतः यह त्रुटि चिन्ताजनक नहीं है ।

 

अप्रतिदर्शीय त्रुटि (Non- Sampling Error) 

यह त्रुटि पक्षपात पूर्ण प्रतिदर्शन (biased Sampling) के कारण उत्पन्न होती है। दूसरे स्थान पर अप्रतिदर्शीय त्रुटि का कारण मापन में की जाने वाली त्रुटि से है। यह त्रुटि मापने के लिये प्रयुक्त उपकरण में विश्वसनीयता एवं वैद्यता की कमी के कारण हो सकती है। इसके अतिरिक्त अप्रतिदर्शीय त्रुटि का तीसरा कारण-ऑकड़ों को लिखने व्यवस्थित करने एवं विश्लेषित करने में हुयी त्रुटि एवं कमी से है। कभी-कभी हम ऑकड़ो का ठीक से सम्पादन नहीं कर पाते जिससे परिणाम दोषपूर्ण हो जाते हैं।

 

स्पष्ट है कि अनुसन्धान में प्रतिदर्शन बहुत ही महत्वपूर्ण चरण है। क्योंकि इसी प्रक्रिया पर शोध के परिणाम की शुद्धता एवं व्यापकता निर्भर होती है । अतः इसे अत्यन्त सावधानी के साथ किया जाना परमावश्यक है । 

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