मानव विकास के अध्ययन की विधियाँ |Methods of Study of Human Development

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 मानव विकास के अध्ययन की विधियाँ
Methods of Study of Human Development 
मानव विकास के अध्ययन की विधियाँ Methods of Study of Human Development


  • शोधकर्ता बाल विकास के सम्बन्ध में डेटा एकत्रित करने हेतु विभिन्न प्रकार की तकनीकों का प्रयोग करते हैं। आगे विभिन्न शोध विधियों का वर्णन है जो मानव विकास के विभिन्न पहलुओं का अध्ययन करने में प्रयोग में लायी जाती हैं। आइये अब उन विधियों के बारे में पढ़ते हैं। 


 

डेटा एकत्रित करने की तकनीकें

शोधकर्ता बुजुर्ग लोगों के समायोजन के तरीकोंकिशोरों में युवावस्था के परिवर्तनोंउत्तर बाल्यावस्था के खेल, पूर्व बाल्यावस्था के दौरान सामाजिक व्यवहार आदि के अध्ययन में दिलचस्पी रख सकते हैं। इन सभी के लिए डाटा एकत्रित करने के लिए निम्नलिखित विधियों का प्रयोग कर सकते हैं:

 

I. मानव विकास के अध्ययन की अवलोकन विधि

 

  • जब भी और जहां भी हों वहाँ पर ही गतिविधियों की व्यवस्थित रिकार्डिंग ही अवलोकन कहलाती है। शोधकर्ता वैज्ञानिक अवलोकन हेतु अपने विशिष्ट कौशल का प्रयोग करते हैं जो उन्होंने ट्रेनिंग द्वारा प्राप्त किया है तथा निरंतर अभ्यास से उसे और परिष्कृत कर लिया है। यह महत्वपूर्ण कौशल ही उन्हें बताते हैं कि क्या देखना है, जो देखा है उसे याद रखना, गतिविधि में आने वाले परिवर्तन को समझना तथा अपने अवलोकन का प्रभावी रूप से संचार करना आदि।

 

अवलोकन करने से पूर्व शोधकर्ता को निम्नलिखित मुद्दों के सम्बन्ध में स्पष्ट होना चाहिए:

  • अवलोकन की जाने वाली गतिविधि की जानकारी अर्थात ये जानना कि वे क्या देखना चाहते हैं।
  • व्यक्ति की पहचान (शैशवावस्था, उत्तर बाल्यावस्था, किशोरावस्था या वयस्क), अर्थात ये जानना कि वो किसे देख रहे हैं।
  • अवलोकन का समय अर्थात अवलोकन कब किया जाए।
  • अवलोकन का स्थान (प्रयोगशाला, वास्तविक दुनिया में स्थापित स्थान जैसे डे-केयर सेंटर, खेल के मैदान, कक्षाएं, सामाजिक मेल-जोल के स्थान आदि), अर्थात अवलोकन कहाँ किया जाए।
  • अवलोकन को रिकॉर्ड करने की विधि (लिखकर, टेप रिकार्डिंग या वीडियो आदि) अर्थात अवलोकन कैसे किया जाए।

 

II. मानव विकास के अध्ययन की साक्षात्कार एवं सर्वेक्षण विधि

  • इन दोनों विधियों में जिस गतिविधि का अध्ययन करना है, लोगों से उस सम्बन्ध में जानकारी एकत्रित करने के लिए कुछ प्रश्न तैयार किए जाते हैं। कभी-कभी ये जानकारी एकत्रित करने का सबसे अच्छा तथा तेज तरीका होता है। ये दोनों तकनीकें माता-पिता के अनुशासन की तकनीकों से लेकर विभिन्न उम्र के बच्चों द्वारा प्रयोग की जा रही अंकीय प्रौद्योगिकी तक के विषयों के विस्तृत क्षेत्र के अध्ययन में महत्वपूर्ण हैं।

 

  • साक्षात्कार तथा सर्वेक्षण विधियों के कुछ गुण एक समान हैं। उदाहरण के लिए दोनों में व्यक्ति से फोन द्वारा या इंटरनेट द्वारा संपर्क किया जा सकता है। दोनों में ही दो प्रकार के प्रश्न हो सकते हैं, संरचित और असंरचित (structured & unstructured)। संरचित प्रकार के प्रश्नों में प्रत्येक प्रतिवादी की भिन्न प्रतिक्रिया होती है। असंरचित प्रश्नों के प्रकार में प्रतिवादी को दिए गए विकल्पों या प्रतिक्रियाओं में एक को चुनना होता है।

 

  • साक्षात्कार तथा सर्वेक्षण विधियों में प्रमुख अंतर यह है कि साक्षात्कार विधि का प्रयोग तब किया जाता है जब एक समय में एक या दो व्यक्तियों से सूचना एकत्रित करनी होती है । दूसरी ओर सर्वेक्षण विधि मुख्य रूप से तब मत्वपूर्ण होती है जब बहुत सारे व्यक्तियों से एक साथ जानकारी लेनी होती है। इस विधि में एक साधन प्रश्नावली का प्रयोग किया जाता है जो कि सावधानीपूर्वक बनाए गए प्रश्नों का एक समूह होता है जिसमें प्रश्न साफ़, निष्पक्ष तथा स्पष्ट होते हैं।

 

  • इन दोनों की उपयोगिता के अतिरिक्त इनकी कुछ एक समान कमियां भी हैं। जैसे कई बार प्रतिवादी अपनी वास्तविक भावना को बताने के बजाय वह उत्तर या प्रतिक्रिया देते हैं जिसका उन्हें विश्वास होताहै कि वह सामाजिक रूप से स्वीकार्य है या समाज में वांछनीय है। उदाहरणार्थ जब किसी किशोर से यह पूछा जाए कि क्या वह नशा करता है तो वह सच को छुपा सकता है तथा उसका जवाब नहीं हो सकता है जबकि वास्तव में वह नशा करता होगा क्योंकि नशा करने वाले को समाज स्वीकार नहीं करता।

 

III. मानव विकास के अध्ययन की मानकीकृत परीक्षण विधि

 

  • ये डेटा एकत्र करने की दूसरी विधि है जिसमें मानकीकृत परीक्षणों द्वारा मानव विकास के विभिन्न पहलुओं जैसे बुद्धि, अनुभूति, रचनात्मकता, मनोभाव तथा तर्क से बुद्धि को मापा जा सकता है तथा तुलना की जा सकती है। परन्तु मानकीकृत परीक्षणों के बहुत नुकसान भी हैं, अतः इन परीक्षणों को सावधानीपूर्वक करना चाहिए।

 

Summary

  • डेटा एकत्र करने की इस विधि में व्यक्ति विशेष का गहराई से अध्ययन किया जाता है। इस विधि से हमें व्यक्ति की महत्वाकांक्षाओं, विश्वासों, डर, आशाओं, दर्दनाक अनुभवों, संबंधों, स्वास्थ्य तथा मानव जीवन के अन्य पहलुओं के सम्बन्ध में विस्तृत जानकारी प्राप्त होती है। ये डेटा हमें व्यक्ति के मन एवं व्यवहार को समझने में मदद करता है।

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