मानव विकास के अध्ययन की समकालीन एवं दीर्घकालीन प्रणालियाँ|Contemporary and Long-Term Learning Systems

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मानव विकास के अध्ययन की समकालीन एवं दीर्घकालीन प्रणालियाँ

Contemporary and Long-Term Learning Systems of Human Development 
 
मानव विकास के अध्ययन की समकालीन एवं दीर्घकालीन अध्ययन प्रणालियाँ Contemporary and Long-Term Learning Systems of Human Development

  • कभी-कभी शोधकर्ता यह जानने में उत्सुक होता है कि बच्चे का व्यवहार हर आयु क्रम में परिवर्तित क्यों होता रहता है। उदाहरण के लिए वह यह बताने में भी रुचि रख सकते हैं कि विकास के दौरान अर्थात नवजात अवस्था से किशोरावस्था तक बच्चे की भाषा का विकास किस प्रकार होता है? दूसरी ओर शोधकर्ता यह भी जानना चाह सकता है कि किसी व्यवहार का क्या कारण हो सकता है जैसे बच्चे की शैक्षिक उपलब्धि पर मातृ रोजगार का प्रभाव| इस प्रकार के शोधों के लिए दो प्रकार की शोध विधियां उपलब्ध हैं, दीर्घकालीन अध्ययन प्रणाली एवं समकालीन अध्ययन प्रणाली। 


मानव विकास के अध्ययन की दीर्घकालीन प्रणाली

  • यह विभिन्न आयुक्रमों में बच्चों के व्यवहार का अध्ययन करने की पद्धति है। इस शोध विधि में बार-बार एक ही व्यक्ति का लंबे समय तक अध्ययन किया जाता है, कई बार सालों तक । इसलिए यह विधि शोधकर्ता को यह जानने में सहायता करती है कि किस प्रकार उम्र बढ़ने के साथ विशिष्ट गुण (जैसे खेलना, भाषा, सामाजिक, नैतिक, शारीरिक तथा भावनात्मक आदि) परिवर्तित होते हैं।
  • समकालीन अध्ययन प्रणाली प्रायोगिक या सह सम्बंधित हो सकती है क्योंकि ये विधि कई वर्षों तक चल सकती है, अत: इसमें कुछ बाधाएं भी आ सकती हैं। उदारणार्थ जिस व्यक्ति का अध्ययन किया जा रहा हो वह पलायन की वजह से, बीमारी या मृत्यु से, या फिर विभिन्न कारणों से जैसे अध्ययन में दिलचस्पी न होने के कारण, माता-पिता द्वारा स्वयं को छोड़ देने की वजह से अध्ययन से बाहर हो जाता है। इसके अतिरिक्त इस विधि में समय और धन का बहुत अधिक व्यय करना पड़ता है। 


मानव विकास के अध्ययन की समकालीन प्रणाली

  • इस विधि में शोधकर्ता विभिन्न आयु के बच्चों की एक ही समय में तुलना करते हैं तथा यह परीक्षण करते हैं कि आयु के साथ व्यवहार में किस प्रकार परिवर्तन होता है। उदाहरण के लिए इस तरह के शोध अध्ययन के लिए एक ही समय में 4 साल के, 7 साल के तथा 10 साल के बच्चों के समूह का अध्ययन किया जा सकता है।
  • इस प्रकार के अध्ययन में बच्चों की आयु स्वतंत्र चर हो जाती है। शोधकर्ता यह परीक्षण करने में ध्यान केंद्रित करता है कि आयु किस प्रकार आश्रित चर जैसे स्नेह, गुस्सा, भावनात्मक नियंत्रण, बुद्धिलब्धि, खेल, तार्किक क्षमता, याददाश्त आदि को प्रभावित करती है। समकालीन अध्ययन प्रणाली में दीर्घकालीन अध्ययन प्रणाली की अपेक्षा कम समय व्यय होता है क्योंकि इस विधि में अध्ययन के लिए बच्चे के बड़े होने का इंतज़ार नहीं करना पड़ता।

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